जम्मू-कश्मीर: GST की नई दरों से गत्ता महंगा और तैयार डिब्बा हो गया सस्ता

जीएसटी में कटौती से महंगाई दर कम हो गई है। आम से खास वर्ग तक, दवा से गाड़ी तक अब सस्ते दाम पर उपलब्ध हुए लेकिन इस सौगात के दूसरे पहलू में बड़ी चिंता उद्योगपतियों की भी है जिनका जीएसटी रिटर्न या तो शून्य हो गया है या फिर उसमें कटौती हो गई है।

जम्मू-कश्मीर में लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्योगों में दवा, पैकेजिंग, खाद्य उत्पाद निर्माता और बर्तन उद्योग पर जीएसटी के असर देखने को मिल रहा है। पैकेजिंग उद्योग में पहले कच्चे माल पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत थी, इसे अब बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।

इस छह फीसदी के उछाल के बाद तैयार माल पर जीएसटी को घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया है। पैकेजिंग के उद्योगों में 18 प्रतिशत के साथ तैयार होने वाले माल को 13 प्रतिशत की कटौती के साथ पांच फीसदी जीएसटी पर निर्यात होगा।

केंद्र सरकार ने दवाओं को जीएसटी से मुक्त कर दिया है। इससे आम वर्ग को दवाएं सस्ती मिलेंगी। पहले दवाओं पर पांच फीसदी जीएसटी रिटर्न था और इसका लाभ उद्योगपतियों को जीएसटी अदायगी के रूप में भविष्य में मिल रहा था, लेकिन अब यह संभव नहीं होगा।

यही हाल खाद्य पदार्थों में चॉकलेट समेत अन्य खाद्य उत्पाद बनाने वाले उद्योगों का भी है। इसके अलावा बर्तन बनाने वाले उद्योग से जुड़े कारोबारी भी जीएसटी की नई दरों के बदलाव से चिंता में हैं। इन्हें कच्चा माल बढ़ी हुई जीएसटी के साथ मिलेगा, जबकि तैयार माल जीएसटी घटाकर देना होगा।

पैकेजिंग उद्योग पर पड़ रहा जीएसटी का असरपैकेजिंग उद्योग में सबसे बड़ा बदलाव हुआ है। कच्चे माल पर 18 प्रतिशत जीएसटी और तैयार माल पर पांच फीसदी जीएसटी तय की गई है। इससे पैकेजिंग उद्योग को जीएसटी के तौर पर मिल रहे लाभ भविष्य में नहीं मिल पाएंगे।

पैकेजिंग उद्योग के लिए बड़ा संकट पैदा हो सकता है। केंद्र सरकार को पैकेजिंग उद्योग से जुड़े कारोबारियों की चिंता का समाधान करना चाहिए। खाद्य वस्तुओं का उत्पादन कर रहे उद्योग भी जीएसटी के प्रभाव में आ रहे हैं।

दवा पर पांच फीसदी जीएसटी कटौती से भविष्य में दवा उद्योग जम्मू-कश्मीर आना नहीं चाहेंगे।ललित महाजन, अध्यक्ष, बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्री एसोसिएशन

आम वर्ग को राहत, उद्योगपतियों की दूर हो चिंता

केंद्र सरकार के फैसले से आम वर्ग को महंगाई से राहत मिलेगी। लेकिन उद्योग जगत की चिंताएं भी दूर करने की आवश्यकता है। जीएसटी के अलावा जो लाभ प्रदेश सरकार को देने थे उन्हें लागू किया जाना चाहिए, ताकि एमएसएमई के सेक्टर को विभाजित होने से बचाया जा सके।

उद्योगपति शंका में हैं, उन्हें राहत देने के लिए बड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लिए पैकेज का ऐलान किया था, इस पैकेज को जारी करने का सही वक्त आ चुका है। प्रवीण परगाल, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती

स्क्रैप में खत्म हो जीएसटी

स्क्रैप पर जीएसटी को बढ़ाने का फैसला किया गया है, यह अब 18 फीसदी होगा, जबकि इससे पहले पांच फीसदी था। स्क्रैप पर जीएसटी को खत्म करने की आवश्यकता है। मूल्य वर्धित कर (वैट) के समय स्क्रैप पर कोई टैक्स नहीं था। इससे कालाबाजारी बढ़ने की संभावना है।

इसके अलावा कच्चे माल पर जीएसटी बढ़ाया गया है और तैयार माल पर कम किया गया है। इससे पहले उद्योगपतियों को एसजीएसटी रिफंड मिल जाता था, लेकिन अब इसमें या तो कटौती होगी या फिर बिल्कुल खत्म हो जाएगा। इससे दाम कम नहीं होंगे बल्कि बढ़ जाएंगे। उद्योगपति तैयार माल में अपनी कमाई रखने के बाद ही उत्पाद को बाजार में भेजेगा।

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