
लद्दाख के लेह में बुधवार को भड़की हिंसा के बाद हालात काबू में रखने के लिए अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है। झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई। 80 से अधिक घायल हो गए। पुलिस ने अब तक 50 लोगों को हिरासत में लिया है।
हंगामा उस समय बढ़ा जब लेह एपेक्स बॉडी (LAB) की राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर बुलाए गए बंद के दौरान प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा कार्यालय और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। हिल काउंसिल मुख्यालय में तोड़फोड़ की।
अगली वार्ता 6 अक्तूबर को
कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में बंद बुलाया था। हालात बिगड़ने पर जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत धारा-144 जैसी पाबंदियां लागू कर दीं। सुरक्षा बलों की तैनाती कारगिल, जंस्कार, नुब्रा, द्रास, चांगथांग और लामायुरू तक बढ़ा दी गई है।
हंगामे के बीच वांगचुक ने अपना 15 दिन का अनशन तोड़ते हुए युवाओं से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा, “हमने हमेशा अहिंसक रास्ता अपनाया, लेकिन बुधवार को हुई घटनाओं ने शांति का संदेश कमजोर किया है।
केंद्र सरकार ने हिंसा के लिए राजनीतिक रूप से प्रेरित बयानों को जिम्मेदार ठहराया। जबकि उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने इसे साजिश करार दिया। लद्दाख के भविष्य को लेकर केंद्र और स्थानीय संगठनों के बीच अगली वार्ता 6 अक्तूबर को प्रस्तावित है।



